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The baby is smaller in pregnancy! What should you know?

Samrakshan is a national program of IRIA that aims to reduce avoidable deaths of babies during pregnancy. Samrakshan, under the leadership of Dr. Rijo Mathew Choorakuttil, has initiated a health education series to increase awareness about several important and common conditions of pregnancy. Team Samrakshan discusses about small babies and size of the baby in this segment. Previous articles in the series can be read at fetalradiology.in

Dr Akanksha Baghel, Radiologist at Harda, Madhya Pradesh provided the Hindi Translation and Dr Pradosh Kumar Sarangi, Senior Resident, Department of Radiodiagnosis, SCB Medical College, Cuttack, Odisha provided the Odia Translation 

 

 

  • My doctor says I have a small baby. What does that mean?

 

 

This is a good question. Different babies grow differently in pregnant women and all babies do not grow or have the same size. Doctors group babies based on their size as small babies, appropriate sized or normal sized babies and large sized babies. These groups have been developed after doctors have observed the size of babies at different weeks of pregnancy. Thus, doctors have a range of size for each week of pregnancy. 

 

So, what does a small baby mean? It means that the size of the baby is smaller than what is normal for that week of pregnancy based on what the usual pattern of size or growth is. 

 

 

  • How do we find out if the baby is small?

 

 

Doctors take several measurements of different parts of the body of the baby using an ultrasound test. They will measure the head, the abdomen and the length of the thigh bone which is known as the femur. These measurements are used to find out the weight of the baby. The doctor uses these measurements to find out if the size of the baby is small, normal or large.

 

 

  • Is it normal to have a small baby? Should I be worried?

 

 

We have to understand that a small size does not always mean that there is something wrong with the baby. When we say the baby is small, it means the size of the baby is small compared to other babies of the Same range. 

 

The small size can be genetic. If the parents have a small size, the baby naturally may be small. In this case, the baby maybe small in size but still normal.

 

A small size can occur because of ill health in the mother or a disorder in the baby. We need to rule these out. For example, a mother with high blood pressure may have a small baby and a mother with diabetes may have a large baby. A baby with an abnormality in its organs may not grow well and may be small. 

 

The important thing is to find out if there is a cause why your baby is small. Your doctor can help find that out.

 

 

  • What should I do? Can I do something to increase the size of my baby?

 

 

Consult your doctor and follow up regularly. Your doctor will check the size and also look at your health and the health of the baby in each visit. 

 

Taking care of your health, eating healthy, having enough rest, reducing stress are some of the things you can do. These may not make the size of your baby change but it will definitely help your health and hence help the baby. 

 

 

  • Is it my fault? Did I do something wrong? 

 

 

It is not helpful to decide if anyone is at fault. What is more important is to manage the pregnancy. Not every small baby is abnormal, so it is not necessary to blame yourself. Instead let us focus on working together to give the best chance to the baby. Follow up regularly.  

 

 

  • Will it help if I eat more? Should I eat more of certain foods?

 

 

Eat healthy. There is no need to over eat. Eat locally available foods in appropriate quantities.

 

 

  • Can my baby grow back to normal size? 

 

 

It depends on the underlying cause and its severity and the time available for the baby to grow. Our primary goal in a small baby is to identify and manage conditions that may further affect the health of the baby. 

 

Remember, size is only one part of a healthy baby. 

 

 

  • What tests should I do? When should the tests be done?

 

 

Your doctor will guide you on this. The fetal radiologist will do ultrasound exams to see how the baby is growing. They will do a Doppler test to check the blood flow to the baby. The doctor may advise further lab tests or tests like CT, MRI, Echo etc depending on the underlying cause for the small size of the baby. 

 

The fetal radiologist and the obstetrician will advise the tests and inform you when to follow up based on the results of Doppler tests and other tests. You may be asked to return every 4 weeks, or every 2 weeks or even earlier. 

 

 

  • How often should I follow up with the doctor?

 

It is important to follow up as the fetal radiologist and obstetrician advises. Please remember, it is a team effort between you and the doctor to deliver your child safely. Do not miss follow ups and do not hesitate to inform your doctor if you feel any discomfort.

 

 

  • What should I look out for? What information should I give the doctor?

 

Look out for changes in your health. Take care of your health. You can observe the kicks and movements of your baby. See if it is reducing or becoming absent. You can check your weight regularly. 

 

You know your body well. If you feel any discomfort or change, inform your doctor immediately. 

 

 

  • Will my pregnancy be alright? 

 

Let us work together for the best outcome. Please come for regular follow ups as advised. The Doppler tests will help us identify early about the health of your baby and help to plan delivery. 

 

HINDI TRANSLATION

  1. मेरे डॉक्टर का कहना है कि मेरे गर्भ में पल रहा बच्चा अनुमान से छोटा है । इसका क्या मतलब हुआ ?

 

यह एक अच्छा प्रश्न है।  गर्भावस्था के दौरान गर्भ में पल रहा हर एक बच्चा अलग बढ़त दिखता है और किसी भी स्थिति में एक ही समयावधि की गर्भावस्थाओं में भी पल रहे बच्चे एक जैसी बढ़त नहीं दिखाते या कहें कि उनका वजन एक सा नहीं होता।  डॉक्टर गर्भ में पल रहे बच्चों को उनके वज़न के आधार पर मुख्य तौर पर तीन श्रेणियों  में रखते हैं : पहली ) अनुमान से कम वज़न के बच्चे जिन्हें चिकित्सकीय भाषा में ‘ ग्रोथ रेटार्डेड’ भी कहते हैं या कहें आयु से लघुतर गर्भ;  दूसरी ) उचित वज़न के बच्चे और तीसरी) अनुमान से अधिक वज़न के बच्चे। इन श्रेणियों का विकास डॉक्टर्स द्वारा पहले की बहुत सी गर्भावस्थाओं में प्रत्येक सप्ताह में शिशुओं के आकार या वज़न के अवलोकन के बाद हुआ है। इसलिए तो डॉक्टरों के पास गर्भावस्था के प्रत्येक सप्ताह के लिए आकार या वज़न की एक रेंज होती है जिसके आधार पर वो आपको ये बता पाए कि बच्चे का वज़न कम है । 

तो, गर्भ में पल रहे बच्चे का वज़न कम होने का क्या मतलब है ?  इसका ये मतलब हुआ कि वज़न में बढ़त के सामान्य ढंग को देखा जाए तो उस सप्ताह की गर्भवस्था के अनुमान से बच्चे का वज़न औरों से कम है।

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  1. अगर गर्भ में पल रहे बच्चे का वज़न कम है तो हमें कैसे पता चलेगा?

 

डॉक्टर सोनोग्राफी के माध्यम से गर्भ में पल रहे बच्चे के शरीर के कुछ विशेष अंगों की मापें लेते हैं।  जिसमें वे सिर, पेट और जांघ की हड्डी की लंबाई जिसे कि फीमर कहते हैं, को नापते हैं।  इन्हीं मापों का इस्तेमाल करके गर्भ में पल रहे बच्चे के वज़न का अनुमान लगाया जाता है।  डॉक्टर इन मापों का उपयोग यह पता लगाने के लिए करते हैं कि शिशु का अनुमानित वज़न गर्भावस्था के उस हफ़्ते के हिसाब से कम है ….या ज्यादा है …..या सामान्य ही है।

 

  1. बच्चे का वज़न अनुमान से कम होना क्या सामान्य बात है ? क्या मुझे इस बारे में चिंतित होना चाहिए ?

 

हमें ये बात समझनी चाहिए, कि ज़रूरी नहीं कि अगर गर्भ में पल रहा बच्चा अनुमान से कम वज़न का हो तो उसके विकास में कोई गड़बड़ी हो ही। जब भी हम ये कहें कि बच्चे का वज़न कम है, तो इसका ये मतलब हुआ कि बच्चे का वज़न उस हफ़्ते की गर्भावस्था के अन्य बच्चों से तुलनात्मक कम है।

 

छोटा आकार या कम वज़न का होना वंशानुगत हो सकता है।  यदि माता-पिता की कद काठी कम है, तो स्वाभाविक है बच्चे की भी हो । इन मामलों में, बच्चे का वज़न भले ही उस हफ़्ते की गर्भावस्था में अनुमानित वज़न से कम हो लेकिन ये उसके लिए सामान्य हो सकता है।

 

गर्भ में पल रहे बच्चे का अनुमान से कम वज़न का होना माता की अस्वस्थता या पल रहे बच्चें में किसी विकार के कारण हो सकता है । हमें इसके कारणों का पता लगाने की ज़रूरत होती है।  उदाहरण के लिए, यदि माँ को उच्च रक्तचाप की शिकायत है तो पल रहा बच्चा कम वज़न का हो सकता है और वहीं अगर माँ को मधुमेह की शिकायत है, तो ज्यादार स्थितियों में बच्चे का वज़न उस हफ़्ते की बढ़त के हिसाब से सामान्य से अधिक पाया जाता है । साथ ही अंगों में किसी भी प्रकार के विकार के साथ पल रहा बच्चा भी ज़्यादातर मामलों में कम बढ़त दिखाता है।

 

महत्वपूर्ण ये है, कि उन कारणों का पता लगाया जाए जिनके चलते बच्चा कम बढ़त दिखा रहा है।  आपके डॉक्टर यह पता लगाने में मदद कर सकते हैं।

 

 

  1. मुझे क्या करना चाहिए? क्या मैं अपने बच्चे का वज़न बढ़ाने के लिए कुछ कर सकती हूँ ?

 

अपने चिकित्सक से परामर्श लें और नियमित रूप से दिखाएं । आपके डॉक्टर पल रहे बच्चे के वज़न की जाँच करेंगे और प्रत्येक दौरे में आपके साथ साथ बच्चे के स्वास्थ्य का भी जायज़ा लेंगें।

अपने स्वास्थ्य का ध्यान रखिये,  स्वस्थ भोजन कीजिये, पर्याप्त मात्रा में आराम लीजिये और तनावमुक्त रहना इत्यादि कुछ ऐसे काम हैं जो आप कर सकतीं हैं।  इनसे पल रहे बच्चे के वज़न में हो सकता है ज़्यादा कुछ बदलाव न हो,  लेकिन इन तरीक़ों से वाकई आपको और पल रहे बच्चे को स्वस्थ रहने में मदद मिलती ही है।

 

  1. क्या इसमें मेरी कोई ग़लती है ? क्या मैंने कुछ गलत किया ?

ये मायने नहीं रखता, कि किसी की गलती है भी या नहीं ।  महत्वपूर्ण ये है, कि गर्भवस्था को कैसे संभाला जाए । अनुमान से कम वज़न वाला हर एक बच्चा असामान्य हो ये जरूरी नहीं, इसलिए खुद को दोष देने की कोई आवश्यकता भी नहीं है।  बजाय इसके…. आईये हम साथ मिलकर पल रहे बच्चे को पालन के सबसे अच्छे संभावित अवसर प्रदान करें।  नियमित रूप से जरूर दिखाएं ।

 

  1. ज्यादा खाना खाने से कुछ मदद मिलेगी क्या ? क्या मुझे कुछ विशेष खाद्य पदार्थों का अधिक सेवन करना चाहिए?

 

स्वस्थ खाएं।  ज़रूरत से ज्यादा खाने की कोई आवश्यकता नहीं है। स्थानीय रूप से आसानी से उपलब्ध खाद्य पदार्थ उचित मात्रा में लिए जाने चाहिए ।

 

  1. क्या मेरा बच्चा वापस सामान्य वज़न का हो सकता है ?

 

यह अंतर्निहित कारणों, उनकी गम्भीरताओं और गर्भावस्था के लिए हमारे पास उपलब्ध समय पर निर्भर है। अनुमान से कम वज़न की स्थिति में हमारी पहली प्राथमिकता उसमें निहित कारणों की पहचान कर उनका उचित निदान करना है, जिनके चलते पल रहे बच्चे का स्वास्थ्य प्रभावित होता है।

 याद रखें, वज़न स्वास्थ्य का मात्र एक पहलू ही है ।

 

  1. मुझे कौन से परीक्षण कराने चाहिए ? और ये परीक्षण कब किया जाने चाहिए?

 

आपके डॉक्टर इस बारे में आपका मार्गदर्शन करेंगे।  फीटल रेडियोलॉजिस्ट बच्चे की वृद्धि का आंकलन करने के लिए सोनोग्राफी करते हैं ।  वे बच्चे को माँ के गर्भ द्वारा पहुँच रहे रक्त प्रवाह और स्वयं बच्चे के शरीर की प्रमुख रक्तवाहिकाओं में प्रवाह के प्रारूप की जांच करने के लिए सोनोग्राफी की उपयुक्त विधि जिसे डॉप्प्लर परीक्षण कहते हैं का उपयोग करेंगे।  शिशु के कम वज़न या छोटे आकार के अंतर्निहित कारणों को ध्यान में रख कर उसके अनुरूप डॉक्टर आगे के लैब टेस्ट या टेस्ट जैसे सीटी, एमआरआई, इको इत्यादि की सलाह दे सकते हैं।

 

फीटल रेडियोलॉजिस्ट और प्रसूति विशेषज्ञ कुछ परीक्षणों की सलाह दे सकते हैं साथ ही डॉपलर परीक्षणों और अन्य परीक्षणों के परिणामों के आधार पर आपको आगे के परामर्श के बारे में सूचित करेंगे।  हो सकता है कि आपको महीनें में एक बार बुलाया जाए या 15 दिनों के अंतराल से या फिर पहले भी…. ये परिणामों की गंभीरता पर निर्भर करता है ।

 

  1. मुझे डॉक्टर के साथ कितनी बार परामर्श लेना चाहिए ?

 ये महत्वपूर्ण है कि आप फीटल रेडियोलॉजिस्ट और प्रसूति विशेषज्ञ की सलाह का अनुकरण करें । याद रखिये……ये आपके डॉक्टर और आपके बीच एक टीम वर्क है, ताकि आपका बच्चा सुरक्षित जन्म ले सके ।  जितनी बार भी बुलाया जाए परामर्श का कोई भी अवसर चूकना नहीं चाहिए और किसी भी प्रकार की कोई भी असुविधा महसूस होने पर अपने डॉक्टर को सूचित करने में संकोच न करें।

 

  1. मुझे किन बातों का ध्यान रखना चाहिए ? डॉक्टर से कौन सी जानकारी साझा करनी चाहिए ?

 

स्वास्थ्य में होने वाले किसी भी परिवर्तन के बारे में सजग रहना चाहिए ।  अपनी सेहत का ख्याल रखें। आप इस बात का निरीक्षण कर सकतीं हैं कि बच्चा कितनी बार घूमता है।  कहीं ये कम तो नहीं हो रहे या बच्चे ने घूमना बंद तो नहीं कर दिया ।  आप नियमित रूप से अपने वजन की जांच कर सकतीं हैं ।

आप अपने शरीर को अच्छी तरह से समझती हैं।  यदि आपको कोई असुविधा या परिवर्तन महसूस होता है, तो तुरंत अपने डॉक्टर को सूचित करें।

 

  1. क्या मेरी गर्भावस्था ठीक रहेगी ?

 

आईये…. सर्वोत्तम परिणामों के लिए हम मिल कर प्रयास करें ।  कृपया दी गयी सलाह के अनुसार नियमित परामर्श के लिए आएं।  डॉप्प्लर एक ऐसा परीक्षण है जिसमें की हमें बच्चे के स्वास्थ्य के संबंध में जानकारी जल्द ही मिल जाती है और जिसके आधार पर प्रसव या जन्म की रूपरेखा बनाने में मदद भी मिलती है ।

 

ODIA ( ORIYA) TRANSLATION

 

 

  1. ମୋର ଡାକ୍ତର କୁହନ୍ତି ମୋର ଏକ ଛୋଟ ଶିଶୁ ଅଛି |  ଏହାର ଅର୍ଥ କ’ଣ?

 

 ଏହା ଏକ ଭଲ ପ୍ରଶ୍ନ |  ଗର୍ଭବତୀ ମହିଳାମାନଙ୍କରେ ବିଭିନ୍ନ ଶିଶୁ ଭିନ୍ନ ଭାବରେ ବଢନ୍ତି ଏବଂ ସମସ୍ତ ଶିଶୁ ବଢନ୍ତି ନାହିଁ କିମ୍ବା ସମାନ ଆକାର ଧାରଣ କରନ୍ତି ନାହିଁ | ଡାକ୍ତରମାନେ ଶିଶୁମାନଙ୍କୁ ଆକାର ଉପରେ ଆଧାରକରି  ୩ଟି ଭାବରେ ବିଭକ୍ତ କରନ୍ତି ଯଥା : ଛୋଟ ଶିଶୁ, ଉପଯୁକ୍ତ ଆକାରର ବା ସାଧାରଣ ଆକାରର ଶିଶୁ ଏବଂ ବଡ଼ ଆକାରର ଶିଶୁ। ଡାକ୍ତରମାନେ ଗର୍ଭାବସ୍ଥାର ବିଭିନ୍ନ ସପ୍ତାହରେ ଶିଶୁମାନଙ୍କର ଆକାର ଦେଖିବା ପରେ ଏହିପରି ୩ଟି ଗୃପ ନିର୍ଦ୍ଧାରିତ କରାଯାଇଛି |  ଏହିପରି, ଗର୍ଭାବସ୍ଥାର ପ୍ରତ୍ୟେକ ସପ୍ତାହ ପାଇଁ ଶିଶୁମାନକର ବିଭିନ୍ନ ଆକାର ଥାଏ | 

 

 ତେବେ, ଏକ ଛୋଟ ଶିଶୁର ଅର୍ଥ କ’ଣ?  ଏହାର ଅର୍ଥ ହେଉଛି ଆକାର କିମ୍ବା ଅଭିବୃଦ୍ଧିର ସାଧାରଣ ଢାଞ୍ଚା ଉପରେ ଆଧାର କରି ଗର୍ଭଧାରଣର ସେହି ସପ୍ତାହ ପାଇଁ ସ୍ୱାଭାବିକ ଠାରୁ ଶିଶୁର ଆକାର ଛୋଟ|

 

  1. ଶିଶୁଟି ଛୋଟ କି ନାହିଁ ଆମେ କିପରି ଜାଣିବା?

 

 ଅଲଟ୍ରାସାଉଣ୍ଡ ପରୀକ୍ଷା ବ୍ୟବହାର କରି ଡାକ୍ତରମାନେ ଶିଶୁର ଶରୀରର ବିଭିନ୍ନ ଅଙ୍ଗର ଅନେକ ମାପ ନିଅନ୍ତି।  ସେମାନେ ମୁଣ୍ଡ, ପେଟ ଏବଂ ଜଙ୍ଘ ହାଡର ଲମ୍ବ ମାପ କରିବେ ଯାହା ଫେମର ଭାବରେ ଜଣାଶୁଣା | ଏହି ମାପଗୁଡିକ ଶିଶୁର ଓଜନ ଜାଣିବା ପାଇଁ ବ୍ୟବହୃତ ହୁଏ |  ଶିଶୁର ଆକାର ଛୋଟ, ସାଧାରଣ କିମ୍ବା ବଡ କି ନାହିଁ ଜାଣିବା ପାଇଁ ଡାକ୍ତର ଏହି ମାପଗୁଡିକ ବ୍ୟବହାର କରନ୍ତି |

 

  1. ଏକ ଛୋଟ ସନ୍ତାନ ଜନ୍ମ କରିବା ସ୍ୱାଭାବିକ କି?  ମୁଁ ଚିନ୍ତିତ ହେବା ଉଚିତ କି?

 

 ଆମକୁ ବୁଝିବାକୁ ପଡିବ ଯେ ସର୍ବଦା ଛୋଟ ଆକାରର ଅର୍ଥ ନୁହେଁ ଯେ ଶିଶୁଟିରେ କିଛି ଭୁଲ୍ ଅଛି |  ଯେତେବେଳେ ଆମେ କହିଥାଉ ଶିଶୁଟି ଛୋଟ, ଏହାର ଅର୍ଥ ସମାନ ପରିସରର ଅନ୍ୟ ଶିଶୁମାନଙ୍କ ତୁଳନାରେ ଶିଶୁର ଆକାର ଛୋଟ |

 

 ଛୋଟ ଆକାର ଜେନେଟିକ୍ ( ଜିନ୍ ସମ୍ବନ୍ଧିତ ) ହୋଇପାରେ |  ଯଦି ପିତାମାତାଙ୍କର ଛୋଟ ଆକାର ଥାଏ, ଶିଶୁଟି ସ୍ଵାଭାବିକ ଭାବରେ ଛୋଟ ହୋଇପାରେ |  ଏହି କ୍ଷେତ୍ରରେ, ଶିଶୁଟି ହୁଏତ ଛୋଟ ଆକାରର କିନ୍ତୁ ତଥାପି ସ୍ୱାଭାବିକ | 

 

 ମା’ର ଅସୁସ୍ଥତା କିମ୍ବା ଶିଶୁର ବ୍ୟାଧି ହେତୁ ଶିଶୁ ଛୋଟ ଆକାର ହୋଇପାରେ |  ଆମକୁ ଏଗୁଡିକୁ ବାଦ ଦେବା ଆବଶ୍ୟକ | ଉଦାହରଣ ସ୍ୱରୂପ, ଉଚ୍ଚ ରକ୍ତଚାପ ଥିବା ମା’ର ଏକ ଛୋଟ ଶିଶୁ ହୋଇପାରେ ଏବଂ ମଧୁମେହରେ ପୀଡିତ ମା’ର ଏକ ବଡ଼ ସନ୍ତାନ ହୋଇପାରେ |  ଏହାର ଅଙ୍ଗରେ ଅସ୍ୱାଭାବିକତା ଥିବା ଶିଶୁ ଭଲ ଭାବରେ ବଢିନପାରେ ଏବଂ ଛୋଟ ହୋଇପାରେ |

 

 ଗୁରୁତ୍ୱପୂର୍ଣ୍ଣ କଥା ହେଉଛି ଆପଣଙ୍କ ଶିଶୁ ଛୋଟ ହେବାର କାରଣ ଅଛି କି ନାହିଁ ତାହା ଖୋଜିବାକୁ ପଡିବ |  ତୁମର ଡାକ୍ତର ଏହା ଜାଣିବାରେ ସାହାଯ୍ୟ କରିପାରିବେ |

 

  1. ମୁଁ କ’ଣ କରିବି?  ମୋ ଶିଶୁର ଆକାର ବଢାଇବା ପାଇଁ ମୁଁ କିଛି କରିପାରିବି କି?

 

 ଆପଣଙ୍କର ଡାକ୍ତରଙ୍କ ସହିତ ପରାମର୍ଶ କରନ୍ତୁ ଏବଂ ନିୟମିତ ଅନୁସରଣ କରନ୍ତୁ |  ତୁମର ଡାକ୍ତର ଏହାର ଆକାର ଯାଞ୍ଚ କରିବେ ଏବଂ ପ୍ରତିଥର ପରାମର୍ଶ ବେଳେ ଆପଣଙ୍କ ସ୍ୱାସ୍ଥ୍ୟ ଏବଂ ଶିଶୁର ସ୍ୱାସ୍ଥ୍ୟ ଉପରେ ମଧ୍ୟ ଦୃଷ୍ଟି ଦେବେ |

 

 ନିଜ ସ୍ୱାସ୍ଥ୍ୟର ଯତ୍ନ ନେବା, ସୁସ୍ଥ ଖାଇବା, ଯଥେଷ୍ଟ ବିଶ୍ରାମ ନେବା, ରକ୍ତଚାପ କମାଇବା ହେଉଛି କେତେକ ଜିନିଷ ଯାହା ଆପଣ କରିପାରିବେ |  ଏହାଦ୍ବାରା ହୁଏତ ଆପଣଙ୍କ ଶିଶୁର ଆକାର ପରିବର୍ତ୍ତନ ହୋଇନପାରେ କିନ୍ତୁ ଏହା ନିଶ୍ଚିତ ଭାବରେ ଆପଣଙ୍କ ସ୍ୱାସ୍ଥ୍ୟରେ ସାହାଯ୍ୟ କରିବ ଏବଂ ତେଣୁ ଶିଶୁକୁ ସାହାଯ୍ୟ କରିବ |

 

  1. ଏହା ମୋର ଦୋଷ କି?  ମୁଁ କିଛି ଭୁଲ କରିଛି କି?

 

 କାହାର ଦୋଷ ଅଛି କି ନାହିଁ ତାହା ସ୍ଥିର କରିବା ଦରକାରୀ ନୁହେଁ |  ଅଧିକ ଗୁରୁତ୍ୱପୂର୍ଣ୍ଣ ହେଉଛି ଗର୍ଭଧାରଣକୁ ପରିଚାଳନା କରିବା | ପ୍ରତ୍ୟେକ ଛୋଟ ଶିଶୁ ଅସ୍ୱାଭାବିକ ନୁହେଁ, ତେଣୁ ନିଜକୁ ଦୋଷ ଦେବା ଆବଶ୍ୟକ ନୁହେଁ |  ଏହା ବଦଳରେ ଆସନ୍ତୁ ଶିଶୁକୁ ସର୍ବୋତ୍ତମ ସୁଯୋଗ ଦେବା ପାଇଁ ଏକତ୍ର କାର୍ଯ୍ୟ କରିବା ଉପରେ ଧ୍ୟାନ ଦେବା | ନିୟମିତ ଅନୁସରଣ କରନ୍ତୁ |

 

  1. ଯଦି ମୁଁ ଅଧିକ ଖାଏ ତେବେ ଏହା ସାହାଯ୍ୟ କରିବ କି?  ମୁଁ କିଛି ନିର୍ଦ୍ଦିଷ୍ଟ ଖାଦ୍ୟ ଖାଇବା ଉଚିତ୍ କି?

 

 ସୁସ୍ଥ ଖାଆନ୍ତୁ |  ଅଧିକ ଖାଇବା ଆବଶ୍ୟକ ନାହିଁ |  ଉପଯୁକ୍ତ ପରିମାଣରେ ସ୍ଥାନୀୟ ଉପଲବ୍ଧ ଖାଦ୍ୟ ଖାଆନ୍ତୁ |

 

  1. ମୋ ଛୁଆ ସାଧାରଣ ଆକାରକୁ ଫେରିପାରିବ କି?

 

 ଏହା ମୂଳ କାରଣ ଏବଂ ଏହାର ଗମ୍ଭୀରତା ଏବଂ ଶିଶୁର ବୃଦ୍ଧି ପାଇଁ ଉପଲବ୍ଧ ସମୟ ଉପରେ ନିର୍ଭର କରେ |  ଏକ ଛୋଟ ଶିଶୁପାଇଁ ଆମର ମୂଳ ଲକ୍ଷ୍ୟ ହେଉଛି ପରିସ୍ଥିତିକୁ ଚିହ୍ନିବା ଏବଂ ପରିଚାଳନା କରିବା ଯାହା ଶିଶୁର ସ୍ୱାସ୍ଥ୍ୟ ଉପରେ ଅଧିକ ପ୍ରଭାବ ପକାଇପାରେ |

 

 ମନେରଖ, ଶିଶୁର ଆକାର ଏକ ସୁସ୍ଥ ଶିଶୁର କେବଳ ଗୋଟିଏ ଅଂଶ |

 

  1. ମୁଁ କେଉଁ ପରୀକ୍ଷା କରିବା ଉଚିତ୍?  ପରୀକ୍ଷା କେବେ କରାଯିବା ଉଚିତ୍?

 

 ଆପଣଙ୍କ ଡାକ୍ତର ଆପଣଙ୍କୁ ଏହି ବିଷୟରେ ମାର୍ଗଦର୍ଶନ କରିବେ |  ଶିଶୁଟି କିପରି ବଢୁଛି ଦେଖିବା ପାଇଁ ଭୃଣରେଡିଓଲୋଜିଷ୍ଟ (ରଂଜନରଶ୍ମି ବିଭାଗ ବିଶେଷଜ୍ଞ) ଅଲଟ୍ରାସାଉଣ୍ଡ ପରୀକ୍ଷା କରିବେ |  ଶିଶୁର ରକ୍ତ ପ୍ରବାହ ଯାଞ୍ଚ କରିବା ପାଇଁ ସେମାନେ ଏକ ଡୋପଲର ପରୀକ୍ଷା କରିବେ | ଶିଶୁର ଛୋଟ ଆକାରର ମୂଳ କାରଣ ଉପରେ ନିର୍ଭର କରି ଡାକ୍ତର ଅଧିକ ଲ୍ୟାବ ପରୀକ୍ଷା କିମ୍ବା CT, MRI, ECHO (ଇକୋ) ଇତ୍ୟାଦି ପରାମର୍ଶ ଦେଇପାରନ୍ତି |

 

  ଭୃଣରେଡିଓଲୋଜିଷ୍ଟ ଏବଂ ପ୍ରସୂତି ବିଶେଷଜ୍ଞମାନେ ପରାମର୍ଶ ଦେବେ ଏବଂ ଡୋପଲର ପରୀକ୍ଷା ଏବଂ ଅନ୍ୟାନ୍ୟ ପରୀକ୍ଷଣର ଫଳାଫଳ ଉପରେ ଆଧାର କରି କେବେ ଅନୁସରଣ କରିବେ ତାହା ଜଣାଇବେ |  ଆପଣଙ୍କୁ ପ୍ରତି ୪ ସପ୍ତାହରେ, କିମ୍ବା ପ୍ରତି ୨ ସପ୍ତାହରେ କିମ୍ବା ତା’ପୂର୍ବରୁ ଡାକ୍ତରଙ୍କୁ ଦେଖାକରିବାକୁ କୁହାଯାଇପାରେ |

 

  1. ମୁଁ କେତେଥର ଡାକ୍ତରଙ୍କ ସହିତ ଅନୁସରଣ କରିବା ଉଚିତ୍?

 ଭୃଣରେଡିଓଲୋଜିଷ୍ଟ ଏବଂ ପ୍ରସୂତି ବିଶେଷଜ୍ଞ ପରାମର୍ଶ ଅନୁଯାଇ ଅନୁସରଣ କରିବା ଜରୁରୀ ଅଟେ |  ଦୟାକରି ମନେରଖନ୍ତୁ, ଆପଣଙ୍କ ପିଲାଙ୍କୁ ନିରାପଦରେ ପହଞ୍ଚାଇବା ପାଇଁ ଏହା ଆପଣଙ୍କ ଏବଂ ଡାକ୍ତରଙ୍କ ମଧ୍ୟରେ ଏକ ମିଳିତ ପ୍ରୟାସ |  ଅନୁସରଣକୁ ହାତଛଡା କରନ୍ତୁ ନାହିଁ ଏବଂ ଯଦି ଆପରଙ୍କ କୌଣସି ଅସୁବିଧା ଅନୁଭବ କରୁଛନ୍ତି ତେବେ ଡାକ୍ତରଙ୍କୁ ଜଣାଇବାକୁ କୁଣ୍ଠାବୋଧ କରନ୍ତୁ ନାହିଁ |

 

  1. ମୁଁ କ’ଣ ଦେଖିବା ଉଚିତ୍?  ମୁଁ ଡାକ୍ତରଙ୍କୁ କେଉଁ ସୂଚନା ଦେବା ଉଚିତ୍?

 ଆପଣଙ୍କ ସ୍ୱାସ୍ଥ୍ୟରେ ପରିବର୍ତ୍ତନ ପାଇଁ ଦେଖନ୍ତୁ |  ନିଜ ସ୍ୱାସ୍ଥ୍ୟର ଯତ୍ନ ନିଅନ୍ତୁ | ଆପଣ ନିଜ ଶିଶୁର କିକ୍ (ଗୋଇଠା ମାରିବା) ଏବଂ ଗତିବିଧି ଉପରେ ନଜର ରଖିପାରିବେ |  ଏହା କମୁଛି କି ନାହିଁ ଦେଖନ୍ତୁ | ଆପଣ ନିୟମିତ ଭାବରେ ଆପଣଙ୍କର ଓଜନ ଯାଞ୍ଚ କରିପାରିବେ |

 

 ଆପଣ ଆପରଙ୍କର ଶରୀରକୁ ଭଲ ଭାବରେ ଜାଣିଛନ୍ତି |  ଯଦି ଆପରଙ୍କ କୌଣସି ଅସୁବିଧା କିମ୍ବା ପରିବର୍ତ୍ତନ ଅନୁଭବ କରୁଛନ୍ତି, ତୁରନ୍ତ ଡାକ୍ତରଙ୍କୁ ଜଣାନ୍ତୁ |

 

  1. ମୋର ଗର୍ଭଧାରଣ ଠିକ୍ ହେବ କି?

 ଆସନ୍ତୁ ସର୍ବୋତ୍ତମ ଫଳାଫଳ ପାଇଁ ଏକାଠି କାମ କରିବା |  ପରାମର୍ଶ ଅନୁଯାୟୀ ଦୟାକରି ନିୟମିତ ଚେକ ଅପ ପାଇଁ ଆସନ୍ତୁ |  ଡୋପଲର ପରୀକ୍ଷା ଆମ ଶିଶୁର ସ୍ୱାସ୍ଥ୍ୟ ବିଷୟରେ ଶୀଘ୍ର ଚିହ୍ନଟ କରିବାରେ ସାହାଯ୍ୟ କରିବ ଏବଂ ପ୍ରସବ ଯୋଜନାରେ ସାହାଯ୍ୟ କରିବ |

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